KALYAN MATKA PANEL CHART
| Date | MON | TUE | WED | THU | FRI | SAT | ||||||||||||
|
2/01/2006 |
9 |
91 |
2 |
1 |
73 |
5 |
2 |
99 |
2 |
1 |
87 |
2 |
5 |
84 |
1 |
3 |
68 |
2 |
|
9/01/2006 |
3 |
28 |
1 |
3 |
68 |
3 |
6 |
21 |
1 |
3 |
17 |
1 |
2 |
00 |
6 |
5 |
88 |
1 |
|
16/01/2006 |
5 |
08 |
3 |
1 |
75 |
4 |
2 |
00 |
5 |
3 |
24 |
1 |
4 |
39 |
2 |
5 |
94 |
1 |
|
23/01/2006 |
7 |
52 |
6 |
2 |
00 |
3 |
1 |
13 |
4 |
|
** |
|
2 |
05 |
4 |
3 |
62 |
1 |
|
30/01/2006 |
6 |
96 |
2 |
1 |
32 |
1 |
4 |
07 |
8 |
1 |
60 |
2 |
1 |
88 |
2 |
8 |
51 |
4 |
|
6/02/2006 |
2 |
38 |
1 |
1 |
02 |
1 |
3 |
81 |
4 |
5 |
62 |
1 |
1 |
67 |
3 |
4 |
63 |
5 |
|
13/02/2006 |
2 |
47 |
1 |
6 |
47 |
1 |
2 |
46 |
3 |
1 |
24 |
7 |
4 |
26 |
3 |
4 |
40 |
6 |
|
20/02/2006 |
5 |
98 |
1 |
1 |
61 |
5 |
2 |
54 |
1 |
6 |
54 |
2 |
1 |
14 |
4 |
4 |
63 |
4 |
|
27/02/2006 |
2 |
40 |
4 |
2 |
08 |
2 |
1 |
11 |
2 |
2 |
89 |
2 |
4 |
89 |
4 |
1 |
16 |
1 |
|
6/03/2006 |
1 |
41 |
5 |
5 |
08 |
1 |
5 |
39 |
2 |
7 |
56 |
4 |
1 |
54 |
1 |
1 |
29 |
1 |
|
13/03/2006 |
4 |
12 |
5 |
3 |
65 |
4 |
|
** |
|
4 |
08 |
4 |
6 |
23 |
6 |
4 |
03 |
1 |
|
20/03/2006 |
|
** |
|
6 |
04 |
3 |
2 |
91 |
3 |
3 |
49 |
6 |
1 |
92 |
4 |
8 |
71 |
1 |
|
27/03/2006 |
3 |
88 |
3 |
3 |
99 |
2 |
1 |
92 |
5 |
1 |
59 |
2 |
1 |
90 |
1 |
3 |
55 |
1 |
|
3/04/2006 |
2 |
19 |
3 |
3 |
91 |
2 |
1 |
59 |
4 |
3 |
43 |
7 |
2 |
63 |
1 |
2 |
75 |
2 |
|
10/04/2006 |
3 |
61 |
2 |
|
** |
|
8 |
77 |
3 |
4 |
93 |
5 |
1 |
57 |
3 |
2 |
87 |
1 |
|
17/04/2006 |
6 |
93 |
4 |
3 |
15 |
2 |
2 |
36 |
1 |
5 |
95 |
1 |
4 |
52 |
1 |
1 |
11 |
2 |
|
24/04/2006 |
2 |
05 |
1 |
4 |
64 |
2 |
3 |
16 |
3 |
3 |
21 |
2 |
3 |
26 |
1 |
7 |
58 |
2 |
|
1/05/2006 |
1 |
99 |
2 |
1 |
33 |
5 |
7 |
34 |
7 |
|
** |
|
1 |
77 |
1 |
1 |
05 |
1 |
|
8/05/2006 |
5 |
95 |
1 |
2 |
76 |
2 |
1 |
22 |
6 |
1 |
70 |
1 |
1 |
83 |
1 |
3 |
21 |
5 |
|
15/05/2006 |
1 |
97 |
2 |
8 |
60 |
2 |
1 |
93 |
7 |
9 |
79 |
1 |
2 |
37 |
1 |
1 |
30 |
5 |
|
22/05/2006 |
2 |
97 |
7 |
1 |
83 |
5 |
2 |
65 |
1 |
1 |
14 |
1 |
5 |
82 |
1 |
1 |
93 |
1 |
|
29/05/2006 |
4 |
63 |
3 |
1 |
07 |
4 |
1 |
92 |
6 |
6 |
04 |
4 |
1 |
20 |
2 |
1 |
19 |
5 |
|
5/06/2006 |
1 |
84 |
1 |
1 |
19 |
1 |
3 |
81 |
5 |
4 |
59 |
4 |
2 |
56 |
1 |
5 |
02 |
3 |
|
12/06/2006 |
5 |
19 |
2 |
1 |
24 |
4 |
2 |
18 |
2 |
2 |
63 |
1 |
3 |
33 |
1 |
4 |
16 |
1 |
|
19/06/2006 |
1 |
71 |
1 |
3 |
12 |
5 |
3 |
55 |
7 |
6 |
42 |
7 |
2 |
12 |
2 |
3 |
82 |
6 |
|
26/06/2006 |
1 |
05 |
4 |
|
** |
|
8 |
76 |
1 |
4 |
09 |
1 |
1 |
44 |
7 |
2 |
33 |
2 |
|
3/07/2006 |
1 |
15 |
7 |
4 |
20 |
2 |
1 |
27 |
3 |
3 |
59 |
5 |
2 |
24 |
2 |
1 |
37 |
3 |
|
10/07/2006 |
2 |
93 |
2 |
|
** |
|
3 |
57 |
7 |
1 |
18 |
1 |
4 |
20 |
3 |
6 |
41 |
1 |
|
|
||||||||||||||||||
|
17/07/2006 |
1 |
62 |
2 |
1 |
29 |
3 |
2 |
98 |
1 |
7 |
43 |
6 |
5 |
20 |
3 |
7 |
62 |
1 |
|
24/07/2006 |
1 |
36 |
1 |
4 |
11 |
3 |
4 |
51 |
2 |
3 |
61 |
2 |
1 |
68 |
2 |
1 |
16 |
1 |
|
31/07/2006 |
1 |
61 |
1 |
4 |
91 |
3 |
2 |
22 |
2 |
1 |
60 |
1 |
4 |
35 |
3 |
4 |
98 |
4 |
|
7/08/2006 |
1 |
46 |
7 |
3 |
38 |
4 |
|
** |
|
3 |
07 |
4 |
3 |
97 |
5 |
5 |
23 |
5 |
|
14/08/2006 |
1 |
22 |
2 |
|
** |
|
1 |
98 |
8 |
4 |
81 |
1 |
1 |
94 |
2 |
1 |
68 |
1 |
|
21/08/2006 |
7 |
29 |
5 |
3 |
94 |
2 |
3 |
41 |
2 |
6 |
41 |
5 |
2 |
30 |
1 |
3 |
05 |
1 |
|
28/08/2006 |
|
** |
|
2 |
96 |
4 |
1 |
45 |
1 |
3 |
52 |
2 |
3 |
08 |
3 |
1 |
62 |
1 |
|
4/09/2006 |
1 |
56 |
6 |
1 |
09 |
5 |
3 |
90 |
1 |
2 |
92 |
2 |
3 |
30 |
1 |
2 |
84 |
1 |
|
11/09/2006 |
1 |
97 |
3 |
4 |
81 |
1 |
8 |
67 |
3 |
2 |
65 |
2 |
4 |
15 |
2 |
4 |
72 |
3 |
|
18/09/2006 |
4 |
17 |
4 |
2 |
96 |
3 |
6 |
26 |
1 |
1 |
48 |
9 |
4 |
51 |
3 |
6 |
08 |
5 |
|
25/09/2006 |
2 |
02 |
6 |
4 |
37 |
3 |
2 |
65 |
7 |
2 |
87 |
1 |
2 |
57 |
1 |
1 |
36 |
2 |
|
2/10/2006 |
|
** |
|
6 |
35 |
7 |
1 |
25 |
5 |
4 |
13 |
1 |
6 |
17 |
1 |
4 |
82 |
1 |
|
9/10/2006 |
5 |
17 |
2 |
3 |
19 |
3 |
1 |
33 |
2 |
1 |
54 |
7 |
1 |
82 |
6 |
1 |
34 |
2 |
|
16/10/2006 |
2 |
65 |
2 |
1 |
49 |
2 |
2 |
91 |
6 |
|
** |
|
|
** |
|
|
** |
|
|
23/10/2006 |
|
** |
|
|
** |
|
|
** |
|
|
** |
|
5 |
87 |
7 |
4 |
23 |
6 |
|
30/10/2006 |
2 |
23 |
7 |
7 |
20 |
2 |
6 |
33 |
4 |
2 |
28 |
1 |
1 |
33 |
1 |
5 |
40 |
1 |
|
6/11/2006 |
2 |
66 |
3 |
4 |
73 |
6 |
1 |
41 |
2 |
4 |
29 |
1 |
3 |
78 |
3 |
1 |
34 |
2 |
|
13/11/2006 |
2 |
62 |
4 |
1 |
10 |
1 |
2 |
53 |
2 |
2 |
39 |
2 |
6 |
58 |
5 |
1 |
75 |
3 |
|
20/11/2006 |
5 |
82 |
1 |
4 |
81 |
3 |
2 |
72 |
5 |
1 |
02 |
1 |
1 |
11 |
5 |
5 |
03 |
1 |
|
27/11/2006 |
6 |
44 |
3 |
6 |
27 |
5 |
1 |
75 |
3 |
1 |
88 |
4 |
3 |
87 |
1 |
1 |
57 |
1 |
|
4/12/2006 |
6 |
47 |
4 |
5 |
07 |
1 |
1 |
49 |
5 |
4 |
84 |
6 |
3 |
90 |
6 |
2 |
48 |
2 |
|
11/12/2006 |
5 |
72 |
2 |
1 |
88 |
3 |
8 |
51 |
1 |
6 |
46 |
7 |
7 |
60 |
4 |
2 |
14 |
2 |
|
18/12/2006 |
4 |
74 |
5 |
3 |
57 |
4 |
5 |
80 |
2 |
5 |
96 |
8 |
2 |
93 |
2 |
5 |
14 |
7 |
|
25/12/2006 |
2 |
09 |
5 |
3 |
66 |
3 |
1 |
69 |
3 |
6 |
65 |
1 |
4 |
47 |
1 |
3 |
04 |
2 |
|
1/01/2007 |
|
** |
|
1 |
59 |
3 |
4 |
98 |
3 |
2 |
90 |
5 |
7 |
77 |
2 |
3 |
21 |
6 |
|
8/01/2007 |
7 |
53 |
1 |
4 |
31 |
2 |
3 |
68 |
6 |
4 |
13 |
3 |
6 |
54 |
1 |
4 |
90 |
1 |
|
15/01/2007 |
7 |
57 |
8 |
1 |
56 |
8 |
1 |
22 |
1 |
4 |
25 |
6 |
1 |
88 |
4 |
3 |
76 |
1 |
|
22/01/2007 |
7 |
61 |
1 |
1 |
13 |
1 |
1 |
32 |
5 |
1 |
46 |
8 |
|
** |
|
|
** |
|
|
29/01/2007 |
4 |
97 |
4 |
3 |
93 |
5 |
2 |
50 |
6 |
6 |
66 |
1 |
3 |
96 |
6 |
3 |
74 |
1 |
|
5/02/2007 |
6 |
16 |
1 |
2 |
61 |
3 |
3 |
60 |
6 |
3 |
13 |
4 |
1 |
74 |
1 |
1 |
53 |
6 |
|
12/02/2007 |
7 |
64 |
1 |
3 |
73 |
6 |
3 |
64 |
1 |
4 |
22 |
2 |
2 |
64 |
2 |
5 |
86 |
7 |
|
19/02/2007 |
1 |
93 |
3 |
6 |
44 |
2 |
5 |
08 |
2 |
8 |
57 |
1 |
1 |
73 |
4 |
1 |
05 |
2 |
|
26/02/2007 |
1 |
44 |
1 |
1 |
77 |
3 |
8 |
56 |
5 |
5 |
20 |
4 |
4 |
07 |
3 |
5 |
26 |
2 |
|
5/03/2007 |
3 |
71 |
2 |
2 |
95 |
4 |
7 |
63 |
2 |
1 |
34 |
3 |
1 |
86 |
2 |
4 |
55 |
8 |
|
12/03/2007 |
1 |
48 |
3 |
1 |
32 |
6 |
1 |
91 |
2 |
2 |
23 |
5 |
3 |
38 |
2 |
5 |
03 |
2 |
|
19/03/2007 |
5 |
76 |
1 |
3 |
66 |
2 |
1 |
70 |
1 |
5 |
24 |
1 |
1 |
59 |
5 |
3 |
79 |
1 |
|
26/03/2007 |
1 |
63 |
3 |
1 |
20 |
1 |
2 |
76 |
4 |
1 |
06 |
2 |
8 |
68 |
1 |
3 |
59 |
2 |
|
2/04/2007 |
4 |
21 |
2 |
3 |
47 |
1 |
9 |
97 |
1 |
6 |
38 |
3 |
2 |
01 |
6 |
1 |
94 |
3 |
|
9/04/2007 |
4 |
09 |
4 |
4 |
29 |
1 |
1 |
47 |
1 |
4 |
01 |
6 |
5 |
28 |
1 |
1 |
23 |
6 |
|
16/04/2007 |
4 |
83 |
3 |
1 |
80 |
4 |
1 |
93 |
7 |
7 |
54 |
3 |
5 |
94 |
7 |
1 |
34 |
1 |
|
23/04/2007 |
6 |
05 |
3 |
3 |
70 |
1 |
4 |
97 |
4 |
3 |
66 |
2 |
1 |
49 |
4 |
2 |
60 |
5 |
|
30/04/2007 |
7 |
31 |
5 |
2 |
23 |
1 |
1 |
66 |
5 |
4 |
48 |
5 |
2 |
01 |
2 |
2 |
71 |
6 |
|
7/05/2007 |
1 |
84 |
2 |
1 |
25 |
1 |
1 |
08 |
3 |
3 |
85 |
2 |
1 |
88 |
1 |
1 |
27 |
2 |
|
14/05/2007 |
6 |
22 |
6 |
1 |
48 |
4 |
4 |
37 |
1 |
2 |
39 |
1 |
2 |
79 |
1 |
7 |
55 |
4 |
|
21/05/2007 |
4 |
01 |
3 |
1 |
01 |
5 |
1 |
04 |
1 |
5 |
05 |
1 |
5 |
21 |
3 |
3 |
75 |
2 |
|
28/05/2007 |
2 |
78 |
5 |
1 |
15 |
1 |
7 |
62 |
1 |
1 |
89 |
1 |
3 |
31 |
4 |
5 |
87 |
1 |
|
4/06/2007 |
2 |
72 |
3 |
7 |
30 |
2 |
1 |
35 |
1 |
2 |
53 |
2 |
2 |
23 |
1 |
6 |
45 |
2 |
|
11/06/2007 |
1 |
39 |
1 |
1 |
67 |
1 |
8 |
70 |
4 |
1 |
94 |
4 |
1 |
73 |
3 |
2 |
46 |
2 |
|
18/06/2007 |
5 |
80 |
1 |
2 |
44 |
3 |
6 |
13 |
2 |
3 |
69 |
2 |
2 |
32 |
3 |
2 |
31 |
1 |
|
25/06/2007 |
3 |
67 |
1 |
1 |
44 |
1 |
1 |
41 |
1 |
1 |
47 |
3 |
1 |
09 |
1 |
|
** |
|
|
2/07/2007 |
4 |
84 |
3 |
7 |
50 |
3 |
1 |
92 |
4 |
2 |
41 |
4 |
1 |
22 |
6 |
1 |
86 |
4 |
|
9/07/2007 |
1 |
49 |
3 |
4 |
91 |
1 |
4 |
78 |
4 |
4 |
50 |
5 |
4 |
25 |
3 |
5 |
34 |
1 |
|
16/07/2007 |
2 |
38 |
8 |
6 |
61 |
1 |
2 |
41 |
2 |
1 |
84 |
2 |
1 |
83 |
2 |
9 |
83 |
1 |
|
23/07/2007 |
2 |
69 |
3 |
1 |
28 |
1 |
1 |
86 |
1 |
5 |
28 |
2 |
1 |
85 |
2 |
4 |
90 |
2 |
|
30/07/2007 |
4 |
82 |
6 |
4 |
82 |
2 |
7 |
21 |
4 |
2 |
19 |
3 |
6 |
04 |
7 |
2 |
15 |
6 |
|
6/08/2007 |
1 |
95 |
2 |
3 |
95 |
2 |
2 |
29 |
4 |
4 |
85 |
3 |
5 |
36 |
8 |
2 |
06 |
4 |
|
13/08/2007 |
5 |
91 |
2 |
7 |
43 |
3 |
|
** |
|
3 |
92 |
7 |
4 |
09 |
3 |
4 |
43 |
3 |
|
20/08/2007 |
3 |
13 |
3 |
3 |
44 |
2 |
5 |
59 |
3 |
2 |
71 |
3 |
2 |
82 |
4 |
5 |
14 |
1 |
|
27/08/2007 |
3 |
41 |
3 |
|
** |
|
6 |
53 |
4 |
4 |
06 |
3 |
3 |
78 |
8 |
2 |
39 |
4 |
|
3/09/2007 |
3 |
57 |
3 |
5 |
15 |
3 |
2 |
48 |
4 |
4 |
29 |
4 |
3 |
92 |
3 |
3 |
68 |
4 |
|
10/09/2007 |
6 |
52 |
2 |
6 |
66 |
3 |
8 |
64 |
7 |
4 |
05 |
6 |
4 |
40 |
3 |
7 |
75 |
2 |
|
17/09/2007 |
1 |
44 |
4 |
6 |
05 |
1 |
3 |
03 |
1 |
5 |
82 |
1 |
6 |
32 |
4 |
1 |
03 |
3 |
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24/09/2007 |
3 |
23 |
5 |
4 |
72 |
3 |
5 |
79 |
3 |
1 |
31 |
1 |
4 |
12 |
6 |
1 |
66 |
7 |
|
1/10/2007 |
3 |
68 |
2 |
1 |
11 |
1 |
1 |
05 |
3 |
1 |
18 |
5 |
5 |
01 |
2 |
3 |
07 |
3 |
|
8/10/2007 |
3 |
61 |
4 |
2 |
55 |
1 |
3 |
88 |
1 |
2 |
74 |
2 |
3 |
22 |
1 |
3 |
93 |
1 |
|
15/10/2007 |
2 |
26 |
3 |
5 |
31 |
5 |
5 |
27 |
4 |
5 |
67 |
2 |
4 |
04 |
1 |
2 |
61 |
2 |
|
22/10/2007 |
2 |
67 |
2 |
1 |
10 |
4 |
6 |
46 |
5 |
1 |
96 |
7 |
2 |
75 |
2 |
1 |
39 |
4 |
|
29/10/2007 |
1 |
23 |
6 |
2 |
34 |
1 |
4 |
32 |
2 |
1 |
27 |
1 |
1 |
94 |
2 |
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47 |
1 |
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5/11/2007 |
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** |
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12/11/2007 |
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** |
|
2 |
10 |
2 |
3 |
19 |
2 |
5 |
24 |
3 |
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19/11/2007 |
7 |
53 |
1 |
1 |
49 |
4 |
1 |
49 |
3 |
4 |
97 |
7 |
3 |
76 |
7 |
8 |
44 |
2 |
|
26/11/2007 |
3 |
95 |
1 |
1 |
55 |
1 |
1 |
76 |
4 |
4 |
43 |
5 |
3 |
34 |
1 |
2 |
15 |
3 |
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3/12/2007 |
2 |
53 |
3 |
1 |
47 |
5 |
2 |
01 |
2 |
2 |
98 |
1 |
4 |
60 |
2 |
1 |
48 |
1 |
|
10/12/2007 |
3 |
55 |
2 |
1 |
70 |
1 |
2 |
08 |
1 |
6 |
49 |
1 |
1 |
75 |
1 |
2 |
49 |
1 |
|
17/12/2007 |
1 |
38 |
5 |
2 |
66 |
2 |
2 |
44 |
1 |
3 |
71 |
1 |
4 |
62 |
6 |
3 |
72 |
5 |
|
24/12/2007 |
5 |
19 |
2 |
1 |
79 |
4 |
2 |
66 |
3 |
1 |
00 |
2 |
1 |
06 |
3 |
2 |
86 |
2 |
|
31/12/2007 |
7 |
43 |
7 |
4 |
71 |
1 |
3 |
73 |
2 |
7 |
41 |
3 |
1 |
39 |
6 |
1 |
54 |
6 |
The Landscape of 2006: Familiar Faces and Predictable Runs
The 2006 Kalyan Panel Chart is remembered as a year of familiarity. Many long-time players recall that Jodis and panels often repeated in neat intervals. Some even claimed the market seemed “predictable” compared to other years.
Patterns were easier to trace, and regulars believed that sticking with a steady strategy paid off. For beginners, 2006 was considered a friendly year — a time when the rules of observation were simple enough to learn without feeling overwhelmed.
Shifts in 2007: A Market Full of Surprises
If 2006 gave players comfort, 2007 shook things up. The chart that year brought sudden changes, surprising outcomes, and Jodis that rarely repeated. Players who had grown confident in 2006 found themselves scrambling to adapt.
For some, it was frustrating; for others, it was thrilling. 2007 reminded everyone that Matka thrives on unpredictability. Many old-timers say that year separated casual guessers from serious observers, forcing them to dig deeper into strategies and rely on intuition as much as data.
What Made 2006–2007 Stand Out?
Looking at the charts today, both years highlight the dual nature of the game: stability and chaos.
- 2006 showed consistency, with many Jodis resurfacing.
- 2007 showed unpredictability, testing players’ patience.
- Together, they created a contrast that still sparks discussions in Matka circles.
This contrast is exactly why the Kalyan Panel Chart 2006–2007 remains such a popular reference point even now.
Why Old Charts Still Matter
Some might wonder: why bother looking at charts that are nearly two decades old? The answer lies in perspective.
- They provide historical context — showing how patterns evolve.
- They give players a sense of cycles — which some believe return after years.
- They keep the community connected — long-time players enjoy revisiting the past, sharing stories, and comparing it to the present.
Even if these charts cannot predict today’s results, they still act as learning tools and conversation starters.
Lessons from 2006 and 2007
- No Year Is the Same: What worked in 2006 didn’t hold true in 2007.
- Adaptability Is Key: Strategies must evolve with the market.
- History Helps Build Intuition: Even if results don’t repeat, studying old charts sharpens observation.
- Community Bonds Matter: Sharing notes and experiences often helped players survive tough years.
Frequently Asked Questions
Q1. What is the Kalyan Panel Chart 2006–2007?
It’s the record of panel results for the Kalyan market during the years 2006 and 2007.
Q2. Why are these years important?
Because they show two contrasting styles — 2006 with consistency and 2007 with unpredictability.
Q3. Can studying these charts improve today’s predictions?
Not directly. But they help players develop observation skills and understand how markets shift.
Q4. How were results followed in those years?
Mostly through physical notes, phone calls, or word-of-mouth, as online platforms weren’t as widespread.
Q5. Where can I find these charts today?
Several websites and community forums archive old Kalyan charts, including those from 2006–2007.